Monday, 10 May 2021

बच्चो में इमयूनटी बडाऐ

 बच्चो में इमयूनटी  बडाऐ


विटामिन  सी    फल  सतरा अनानास  कीवी  खाने को  देवे 

पानी की कमी न होने दें 

शारीरिक विकास के लिए  पोरोटिन दें  पनीर दाल दूध 



Tuesday, 20 April 2021

Garlic health benefits

 


आयुर्वेद में लहसुन को चमत्कारिक गुणों वाला औषधि बताया गया है, जिसके कई फायदे हैं। यह सिर्फ खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाता बल्कि इसके सेवन से शरीर को स्वस्थ रखने में भी मदद मिलती है। यही वजह है कि कई घरेलू नुस्खों में लहसुन का उपयोग किया जाता है। दरअसल, लहसुन में कई प्रकार के पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए फायदेमंद होते हैं। इनमें कैल्शियम से लेकर कॉपर, पोटैशियम, फॉस्फोरस, आयरन और विटामिन बी1 आदि शामिल हैं। वैसे तो किसी भी प्रकार से लहसुन का सेवन फायदेमंद ही होता है, लेकिन खाली पेट इसका सेवन बेहद ही लाभकारी होता है। आइए जानते हैं खाली पेट इसके सेवन के फायदों के बारे में... 

अगर आप रोज सुबह खाली पेट लहसुन का सेवन करें तो पेट संबंधी समस्याओं, जैसे कि कब्ज और गैस से राहत मिल सकती है। साथ ही पाचन तंत्र भी सही रहेगा। जो लोग एसिडिटी की समस्या से परेशान हैं, उन्हें भुना हुआ लहसुन खाने की सलाह दी जाती है।

note    यह सलाह केवल आपको सामान्य जानकारी प्रदान करने के लिए दी गई है। आप किसी भी चीज का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।


Sunday, 18 April 2021

Stomach gas

 








गैस क्या है (What is Gas)

पेट से जुड़ी समस्याओं में पेट में वायु बनना या गैस बनना सबसे आम समस्या  है, इसे पेट या आँतों की गैस और पेट फूलने के रूप में भी परिभाषित किया जाता है। जब खाना खाते हैं तब पाचनक्रिया के दौरान हाइड्रोजन, कार्बनडाइऑक्साइड और मिथेन गैस निकलता है जो गैस बनने या एसिडिटी होने का कारण होता है। वैसे तो आयुर्वेद के अनुसार पेट संबंधी सभी समस्याएं शरीर के त्रिदोष के कारण होते हैं अत: वात, पित्त, कफ इन तीनों क्रियाओं को शांत करने वाले उपचार (gas ki problem ka ilaj) करने चाहिए तथा इन रोगों में जौ, मूँग, दूध, आसव, मधु, इत्यादि का सेवन करना चाहिए। जठराग्नि की दुर्बलता से मल, वात आदि रोग हो जाते हैं तब इससे सारी व्याधिया उत्पन्न होती है मल की अधिकता के कारण जठराग्नि कमजोर होने लगती है। जब पाचन सही प्रकार से नहीं होता है तो उदर में बनने वाली अपान वायु तथा प्राण वायु बहार नहीं निकल पाती है।

पेट में गैस बनने के लक्षण (Symptoms of Gas in Hindi)

आम तौर पर पेट में गैस बनने का मूल लक्षण पेट में दर्द होता है। लेकिन इसके अलावा भी और भी लक्षण है जो एसिडिटी होने पर नजर आते हैं-

  • सुबह जब मल का वेग आता है तो वो साफ नहीं होता है और पेट फूला हुआ प्रतीत होता है।
  • पेट में ऐंठन और हल्के-हल्के दर्द का आभास होना।
  • चुभन के साथ दर्द होना तथा कभी-कभी उल्टी होना।
  • सिर में दर्द रहना भी इसका एक मुख्य लक्षण हैं।
  • पूरे दिन आलस्य जैसा महसूस होता है।

गैस बनने के कारण (Causes of Gas in Hindi)

आयुर्वेद में वात, पित्त एवं कफ इन तीन दोषों के असंतुलन से ही सारे रोग होते हैं तथा इनके सामान्य अवस्था में रहने से व्यक्ति रोगरहित रहता है। उदररोगों में उदरवायु सबसे आम समस्याओं में से एक देखी जाती है, यह वात के कारण होने वाला रोग है। अनुचित आहार-विहार के कारण वात प्रकुपित होकर अनेक रोगों को जन्म देता है तथा उदर में उदरवायु अथवा गैस की समस्या से व्यक्ति को जूझना पड़ता है। आयुर्वेद में वायु के पाँच प्रकार बताए गए हैं- प्राण, उदान, समान, व्यान एवं अपान वायु। उदर वायु समान एवं अपान वायु की विकृति से उत्पन्न होती है। लेकिन इसके पीछे बहुत सारे आम कारण होते हैं जिनके वजह से गैस (pet me gas ke upay) होती है, चलिये इनके बारे में पता लगाते हैं।

  • अत्यधिक भोजन करना
  • बैक्टीरिया का पेट में ज्यादा उत्पादन होना
  • भोजन करते समय बातें करना और भोजन को ठीक तरह से चबाकर न खाना।
  • पेट में अम्ल का निर्माण होना।
  • किसी-किसी दूध के सेवन से भी गैस की समस्या हो सकती है।
  • अधिक शराब पीना
  • मानसिक चिंता या स्ट्रेस
  • एसिडिटी, बदहजमी, विषाक्त खाना खाने से, कब्ज और कुछ विशेष दवाओं के सेवन
  • मिठास और सॉरबिटोल युक्त पदार्थों के अधिक सेवन से गैस बनता है।
  • सुबह नाश्ता न करना या लम्बे समय तक खाली पेट रहना।
  • जंक फूड या तली-भुनी चीजें खाना।
  • बासी भोजन करना।
  • अपनी दिनचर्या में योग और व्यायाम को शामिल न करना।
  • बीन्स, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, उड़द की दाल का अधिक सेवन करना।
  • कुछ खाद्य पदार्थों से कुछ लोगों को गैस बन जाता है जबकि कुछ लोगों को उससे कोई गैस नहीं बनता है जैसे; सेम, गोभी, प्याज, नाशपाती, सेब, आडू, दूध और दूध उत्पादों से अधिकांश लोगों को गैस बनती है।
  • खाद्य पदार्थ जिनमें वसा या प्रोटीन के बजाय कार्बोहाइड्रेट का प्रतिशत ज्यादा होता है, के खाने से ज्यादा गैस बनती है।
  • भोजन में खाद्य समूह में कटौती की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि आप अपने आप को आवश्यक पोषक तत्वों से वंचित भी नहीं रख सकते हैं, अक्सर, जैसे ही एक व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, कुछ एंजाइमों का उत्पादन कम होने लगता है और कुछ खाद्य पदार्थों से अधिक गैस भी बनने लगती है।
  • यहां तक कि स्तनपान करने वाले शिशुओं में उदरवायु यानि पेट में दर्द होने की समस्या अक्सर देखी जाती है। उचित प्रकार से स्तनपान न कराने या माता द्वारा वात बढ़ाने वाले आहार लेने से ऐसी समस्या हो जाती है। वहीं भोजन ग्रहण करने वाले बच्चों में वातवर्धक आहार, फास्ट फूड, जंक फूड इन सब के सेवन से उदरवायु की समस्या देखी जाती है.

Saturday, 17 April 2021

Healthy food

 स्वास्थ्यकारी भोजन

स्वस्थ जीवन जीने के लिए स्वास्थ्यकारी आहार आदतें बहुत महत्व रखती हैं।इसमें खाया गया भोजन, दो खानों के बीच का अन्तराल खाने की चीजों का आपसी मेल व उनकी मात्रा, स्वच्छता तथा खाने के उपयुक्त तरीका शामिल है ।

  • भोजन ताजा, स्वादिष्ट व सुपाच्य होना चाहिए ।
  • किन्हीं भी दो भोजनों में कम से कम चार घंटे का अंतर होना चाहिए ।
  • एक वक्त के भोजन में खाने की सीमित चीजों होना चाहिए और वे परस्पर बेमेल नहीं होनी चाहिए।जैसे दूध व संतरे का रस ।
  • भोजन हल्का होना चाहिए ।
  • भोजन केवल भूख लगने पर ही खाना चाहिए और वह व्यक्ति की पाचन क्षमता के अनुरूप होना चाहिए।
  • भोजन शांत व आनंदमय वातावरण में खाना चाहिए ।
  • भोजन को अच्छी तरह चबाना चाहिए ।
  • भोजन के साथ फल नहीं खाने चाहिए।उन्हें दो भोजनों के वक्त अल्पाहार के रूप में खाना चाहिए ।
  • भोजन के एक घंटे पहले और बाद में पानी नहीं पीना चाहिए।पानी भोजन के बीच- बीच में और कम मात्रा में पीना चाहिए ।

शरीर के क्रियाकलापों में संतुलन बनाए रखने के लिए उपयुक्त व नियमानूसार नींद बहुत जरूरी है।अच्छे स्वास्थ्य का मूलमंत्र है – “जल्दी सोना और जल्दी उठना” एक औसत व्यक्ति के लिए 6-8 घंटे की नींद पर्याप्त होती है आदर्श नींद वह है जिसमें कोई व्यवधान न पड़े और जो 100-100 मिनट के चार क्रमिक चक्रों में ली जाए यानी 6 घंटे और 40 मिनट की चार बार में ली गई नींद।अधिक सोने से आलस्य तथा रोग पैदा होते हैं ।....

Hairgrowth

 

बालों की रूसी दूर करने के लिए

१. नारियल के तेल में निम्बू का रस पकाकर रोजाना सर की मालिश करें...

२. पानी में भीगी मूंग को पीसकर नहाते समय शेम्पू की जगह प्रयोग करें....

३. मूंग पावडर में दही मिक्स करके सर पर एक घंटा लगाकर धो दें.

४ रीठा पानी में मसलकर उससे सर धोएं.

५. मछली, मीट अर्थात nonveg त्यागकर केवल पूर्ण शाकाहारी भोजन का प्रयोग भी आपकी सर की रूसी दूर करने में सहायक होगा.

आयुर्वेद के स्वास्थ्य लाभ....

 

आयुर्वेद के स्वास्थ्य लाभ....
 

1. स्वस्थ वजन, त्वचा और बाल का रखरखाव

एक स्वस्थ आहार और आयुर्वेदिक इलाजों के माध्यम से जीवनशैली में संशोधन करके शरीर से अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद मिलती है। आयुर्वेद खान-पान में सुधार लाकर एक स्वस्थ वजन को मेन्टेन करने में मदद करता है। ऑर्गेनिक और प्राकृतिक तरीकों से आप स्वस्थ त्वचा पा सकते है।  सिर्फ यही नही, संतुलित भोजन, टोनिंग व्यायाम और आयुर्वेदिक पूरक / सप्लीमेंट के मदद से न केवल आपका शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि मन भी प्रसन्न रहेग।

2. आयुर्वेदिक इलाज आपको तनाव से बचने में मदद करता हैं।

योग, मेडिटेशन, ब्रीदिंग एक्सरसाइज, मसाज और हर्बल उपचारों का नियमित अभ्यास शरीर को शांत, डिटॉक्सिफाई और कायाकल्प करने में मदद करता है। ब्रीदिंग एक्सरसाइज शरीर पर सक्रमण को बनाए रखते हैं और कोशिकाओं में अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है। अवसाद और चिंता को दूर रखने के लिए आयुर्वेद में शिरोधारा, अभ्यंगम, शिरोभ्यंगम, और पद्यभंगम जैसे व्यायामों की सलाह दिया जाता है।

3. जलन और सूजन में मदद करें:

उचित आहार की कमी, अस्वास्थ्यकर भोजन दिनचर्या, अपर्याप्त नींद, अनियमित नींद पैटर्न और खराब पाचन से सूजन हो सकती है। न्यूरोलॉजिकल रोगों, कैंसर, मधुमेह, हृदय संबंधी समस्याओं, फुफ्फुसीय रोगों, गठिया, और कई अन्य रोगों का मूल कारण सूजन से शुरू होता है। जैसे-जैसे आप अपने दोष के अनुसार खाना शुरू करते हैं, पाचन तंत्र मजबूत होने लगता है। सही समय पर कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन रक्त और पाचन तंत्र में विषाक्त पदार्थों को कम करता है। जिससे जीवन शक्ति और उच्च ऊर्जा प्राप्त होता है और साथ ही साथ मूड स्विंग्स और सुस्ती को कम करने में मदद करता है।

4. शरीर का शुद्धिकरण:

आयुर्वेद में पंचकर्म में एनीमा, तेल मालिश, रक्त देना, शुद्धिकरण और अन्य मौखिक प्रशासन के माध्यम से शारीरिक विषाक्त पदार्थों को समाप्त करने का अभ्यास है। आयुर्वेदिक हर्बल दवाओं में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाने वाले उपयुक्त घरेलू उपचार जीरा, इलायची, सौंफ और अदरक हैं जो शरीर में अपच को ठीक करते है। 

5. कैंसर, निम्न रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल सहित बाकि क्रिटिकल बीमारियों से बचाव:

आयुर्वेदिक उपचार कैंसर की रोकथाम के लिए भी बहुत जाने जाते हैं। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि आयुर्वेदिक आहार और विश्राम तकनीक पट्टिका बिल्डअप को कम करने में मदद करते हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सा जड़ी बूटियों विटामिन, खनिज और प्रोटीन की एक भीड़ प्रदान करती है। ये एक उचित खुराक में एक साथ मिश्रित होते हैं और प्रतिरक्षा संबंधी विकारों को रोकने और मुकाबला करने के लिए एक इष्टतम समय पर प्रशासित होते हैं।

चिकित्सा की इस प्राचीन कला, आयुर्वेद ने पुरातन चिकित्सा शास्त्र के अन्य रूपों जैसे तिब्बती चिकित्सा और पारंपरिक चीनी चिकित्सा को आगे बढ़ने में मदद की है। यह चिकित्सा के सबसे पुराने और प्रचलित रूपों में से एक है। इसका उपयोग यूनानियों द्वारा भी किया जाता था। माना जाता है कि हम जो भोजन करते हैं, वह हमारे सामग्रीक भलाई  पर प्रभाव डालता है, और हमें अभ्यस्त या दुर्बल बना सकता है। हम जो खाते हैं वह निर्धारित करता है के हम ऊर्जावान होंगे या सुस्त होंग।

Thursday, 21 December 2017

गठिया दर्द को कम करने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां


गठिया दर्द ठिक करने आयुर्वेदिक उपाए 



अर्थराइटिस और गठिया आजकल सबसे आम स्वस्थ समस्याओं में से एक है। गठिया की दर्द बहुत तेज होती है, जो व्यक्ति को चलने–फिरने और घुटनों को मोड़ने में परेशान करती है। इसमें घुटनों में दर्द के साथ–साथ सूजन भी आ जाती है। आजकल ठंड के मौसम में गठिया के मरीज़ों को सबसे अधिक परेशानी होती है, इसलिए उन्हें ठंड से बचने का प्रयास करना चाहिए। इस दर्द और सूजन से राहत दिलाने में आहार और आयुर्वेदिक जड़ बूटियां आपको सबसे ज्यादा फायदा देते हैं।
इस बीमारी में डॉक्टर भी मरीजों को खाने पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। गठिया से बचने के लिए आपके आहार में ग्लूकोसामिन और कांड्रायटिन सल्फेवट होना जरुरी है जो हड्डियों और कार्टिलेज के लिए बहुत अच्छें और उपयोगी होते हैं। आइए आज हम पढ़ते है कि कैसे गठिया में आपके कुछ घरेलू नुस्खे इसका सबसे सुरक्षित उपचार होते हैं।

गठिया दर्द को कम करने के लिए  आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां

1. गठिया का अचूक इलाज है अदरक

अदरक ऑस्टियो आर्थराइटिस और रुमेटॉयड आर्थराइटिस या गठिया में सूजन को कम करने में उपयोगी होता है। अदरक गठिया का अचूक इलाज है। अदरक का नियमित उपयोग शरीर में सूजन और गठिया रोग की शुरुआत को होने से रोकता है। अदरक खाने से शरीर के एंटीऑक्सीडेंट रक्षा तंत्र में वृद्धि होती है। गठिया में ऑक्सीडेटिव तनाव के कारण ऊतक और जोड़ों की क्षति की रोकथाम में अदरक मदद करता है। अदरक में सूजन और न्यूरोलॉजिकल संकेतों के कारण दर्द कम करने की क्षमता होती है।

2. शल्लकी

शल्लकी एक बहुत लोकप्रिय प्राकृतिक सूजन विरोधी जड़ी बूटी है, जो पूरे विश्व में आयुर्वेद के चिकित्सकों द्वारा उपयोग की जाती है। शल्लकी को दर्द और सूजन को ठीक करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह किसी भी नुकसान को बिना हड्डियों के स्पॉन्डिलाइटिस और अन्य गठिया के दर्द से मुक्ति दिलाती है।
गठिया का दर्द दूर करते हैं ये जूस

3. गठिया दर्द में उपयोगी है निर्गुंडी

निर्गुंडी एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है शरीर को बीमारियों से बचाना। यह शक्तिशाली जड़ी बूटी है, जिसका उपयोग विभिन्न बीमारियों में किया जाता है। यह एक सुगन्धित वृक्ष से प्राप्त किया जाता है जिसे विटेक्स नेगुंडो कहा जाता है। इसमें फ्लेवोनॉयड, कॉस्टटीन और विटेक्सिन भी होते है जो एंटी-हिस्टामाइन गुणों और मस्तिष्क कार्यों की ठीक करने के लिए जाना जाता है। यह एक एनाल्जेसिक के रूप में कार्य करके अच्छ नींद दिलाने, सिरदर्द, सूजन, जलन और गठिया दर्द में उपयोगी होती है।

4. गठिया का आयुर्वेदिक इलाज है नीलगिरी

नीलगिरी तेल का अर्क जोड़ों में गठिया के दर्द और सूजन को ठीक करने में मदद करता है। नीलगिरी के पत्तों में टैनिन होता है जो जोड़ों में सूजन और दर्द को कम करता है। नीलगिरी गठिया का आयुर्वेदिक इलाज है। नीलगिरी के रस को निचोड़ कर प्रभावित जोड़ों पर लगाया जाता है जो बाद में हीटिंग पैड द्वारा हल्का गर्म कर दर्द में आराम देता है।

5. गठिया से ग्रस्त लोगों के लिए फायदेमंद अजवाइन

अजवाइन के बीजों में स्वास्थ के लिए कई पोषक तत्व होते हैं, जिनमें इनके सूजन विरोधी गुण के कारण यह गठिया से ग्रस्त लोगों के लिए फायदेमंद है। इसके अलावा, इसमें पेट की दर्द और सूजन को कम करने के गुण भी होते हैं। अजवाइन के बीजों में एंटीबायोटिक यौगिक होते हैं, जो सूजन और इससे संबंधित अन्य लक्षणों जैसे लाली, से निपटने में सहायता करते हैं।

6. गठिया की दवा है दशमूल

दशमूल उपयोगी पौधों की दस जड़ों को दिया गया नाम है। आयुर्वेद में इन दस जड़ों के मिश्रण को जोड़ों, मस्तिष्क, मांसपेशियों, हड्डियों और गठिया से संबंधित कई स्वास्थ्य स्थितियों के लिए उपयोग किया जाता है और एक दवा के रूप में काम करता है। इनमें शक्तिशाली सूजन-विरोधी, एंटीऑक्सीडेंट, एनाल्जेसिक और गठिया विरोधी गुण होते है जो विभिन्न आर्थराइटिस और गठिया दर्द में उपयोगी होते हैं।

Wednesday, 20 September 2017

चमकती त्वचा के लिए आसान आयुर्वेदिक नुस्खे

चमकती त्वचा के लिए  आसान आयुर्वेदिक नुस्खे (Top  Ayurvedic Tips For Glowing Skin)


हमें अपनी त्वचा की देखभाल भी प्राकृतिक तरीके (Natual Skin Care)
 से ही करना चाहिए क्योंकि प्रकृति में ही छिपा है हमारी सुंदरता का राज।
 बस हमें इसके असर और इस्तेमाल की जानकारी होनी चाहिए।
इसमें न तो कोई साइड इफेक्ट का डर है और न ही किसी रिएक्शन का खतरा।
चेहरे और त्वचा का सौन्दर्य, रंगत और कोमलता बढ़ाना चाहते हैं
तो हमें प्राकृतिक सौन्दर्य प्रसाधन का इस्तेमाल इसलिए भी करना चाहिए
 क्योंकि इससे हमारे चेहरे और त्वचा में कुदरती आभा आएगी और
यह सुंदरता टिकाऊ भी होगी।
त्वचा को सबसे ज्यादा नुकसान (Harmful Elements for Skin)
 सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों, धूप, प्रदूषण, तनाव, नींद की कमी,
ध्रूमपान और शराब के सेवन से होती है।
बाजार में बिकने वाले महंगे सौंदर्य उत्पाद पर यकीन
 करने की बजाय अगर हम घरेलू और
आयुर्वेदिक नुस्खों (Home based Ayurvedic Remedies)
 को आजमाएं तो त्वचा में निखार और चमक आने के
 साथ-साथ त्वचा स्वस्थ भी रहेगी।
ग्लोइंग स्किन  आयुर्वेदिक नुस्खे (Ayurvedic Tips for Glowing Skin)
1. हल्दी से हटते हैं मुहांसे 
हल्दी एक प्राकृतिक एंटीसेप्टिक एंटी-फंगल है।
 इसके लेप लगाने से त्वचा पर मुहांसे,
पिंपल और पिग्मेंटेशन नहीं होते हैं।
2. चंदन से स्किन में आता ग्लो
बाजार में त्वचा की देखभाल के लिए बिकने बनने वाले
ज्यादातर कॉस्मेटिक में चंदन का इस्तेमाल होता है।
 चंदन से त्वचा में निखार आता है।
चंदन त्वचा को ठंडक भी पहुंचाता है।
 इसके इस्तेमाल से त्वचा पर दाने और मुहांसे नहीं होते हैं।
3. एलोवेरा त्वचा की करती सुरक्षा
एलोवेरा एक नेचुरल एंटी क्लिंजर (Natural Skin Cleanser) है।
 इससे त्वचा चमकदार बनती है। इसमें पाए जाने वाले
एंटी इंफ्लेमटरी गुण से त्वचा की बाहरी परत को सुरक्षा मिलती है।
 इसके इस्तेमाल से स्किन इंफेक्शन (Skin Infection)
होने पर होने वाली जलन भी कम होती है।
4. नीम की पत्ती से त्वचा में आती चमक
त्वचा के लिए नीम की पत्ती काफी कारगर होती है।
 इससे त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है।
नीम की पत्ती के पाउडर और पिसी हुई
गुलाब की पंखुड़ी को नींबू के रस के साथ
मिलाकर लगाने से त्वचा में चमक आती है।
5. एवाकाडो से स्किन को मिलता प्रोटीन
एवाकाडो (Avocado) से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है।
 यह ड्राय स्किन वालों के लिए काफी कारगर है।
एवाकाडो में प्रोटीन होता है, जो त्वचा के लिए काफी फायदेमंद है।
6. नींबू से मिटती हैं झुर्रियां
चेहरे पर नींबू का रस लगाएं। निचोड़े गए नींबू के छिलके भी चेहरे
 पर कुछ दिन तक मल सकते हैं। इससे चेहरे की झुर्रियां मिटेंगी।
धोते समय गालों को हथेलियों से थपथपाकर सुखाएं,
 इससे गालों में रक्त का संचार बढ़ता है और झुर्रियां मिट जाती हैं।
7. डार्क स्पॉट मिटाने के लिए टमाटर है कारगर
चेहरों का डार्क स्पॉट (Dark Spots) मिटाने में टमाटर काफी असरदार है।
 टमाटर के रस में नींबू का रस, हल्दी पाउडर और बेसन मिलाकर लेप बना लें।
 इस लेप को गालों पर लगाएं। सूखने के बाद पानी से चेहरे को धो लें।
 रोज एक बार इसे आजमाएं। डार्क स्पॉट खत्म हो जाएँगे।
8. चुकंदर चेहरे को बनाएगी गुलाबी
चुकंदर का सेवन त्वचा में गुलाबी निखार लाता है।
 चुकंदर में काफी मात्रा में आइरन होता है,
जिससे हीमोग्लोबिन मिलता है। इसे पीस कर चेहरे पर भी लगा सकते हैं।
 रोजाना इसे आजमाने से चेहरे पर गुलाबी निखार आता है।
9. अंकुरित चना और मूंग खाएं
अंकुरित चना और मूंग सुबह-शाम खाएं।
चेहरे की झुर्रियां खत्म होंगी। चना और मूंग में विटामिन ई होता है,
 जो झुर्रियां मिटाने में कारगर होता है।
चना और मूंग नियमित खाने से स्किन में ग्लो आता है।
10. गाजर का रस पीएं
गाजर में एंटी ऑक्सीडेंट पाया जाता है,
एक ग्लास गाजर का रस रोज पिएं। इससे त्वचा में निखार आता है
, झुर्रियां गायब होती हैं।
Natural herbs for glowing skin,
 इन नेचुरल हर्ब से स्किन में आएगा ग्लो

बालों को तेजी से बढ़ाने के लिए आयुर्वेदा तेल

बालों को तेजी से बढ़ाने के लिए आयुर्वेदा  तेल (Best Hair Oils For Faster Hair Growth)


खूबसूरत बाल व्यक्तित्व में तो चार चांद लगाते ही हैं साथ ही अच्छे स्वास्थ्य की निशानी भी होते हैं। आजकल बालों का टूटना, गिरना या पतला होना एक आम समस्या हो गई है। अगर आप प्राकृतिक रूप से बालों की इन समस्याओं से छुटकारा चाहते हैं तो विभिन्न प्रकार के तेल आपकी समस्या का हल हैं।
इनसे बालों की ग्रोथ तो होगी ही, साथ ही स्कैल्प प्रॉब्लम, डैंड्रफ तथा अन्य समस्याएं भी ख़त्म होंगी। जानिए ऐसे ही कुछ तेल के बारे में जो हेयर ग्रोथ (Hair Growth) में लाभकारी होते हैं।
1. भृंगराज तेल (Bhringraj oil)- भृंगराज तेल बालों का गिरना कम करता है, असमय बालों को सफेद होने से बचाता है और बालों को तेजी से बढ़ाता है।
2. कैस्टर हेयर ऑयल (Castor Hair Oil)- इस तेल में विटामिन ई, प्रोटीन और मिनरल प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो कि बालों पर जादुई असर करते हैं। इसके माइक्रोबियल गुण डैंड्रफ तथा अन्य स्कैल्प प्रॉब्लम से दूर रखते हैं। इसमें मौजूद रिसिनोलैक एसिड (Ricinoleic Acid) स्कैल्प इनफ्लेमेशन तथा अन्य बीमारियों से बचाता है। कैस्टर ऑयल बालों को मुलायम बनाने के साथ ही उनकी ग्रोथ भी करता है।
3. जैतून का तेल (Olive Oil)- यह सबसे अधिक मॉइश्चराइज हेयर ऑयल है। इसके विटामिन ई और एंटी ऑक्सीडेंट गुण बालों को स्वस्थ रखते हैं। इसके एंटी इंफ्लेमेटरी गुण बालों को गिरने से रोकते हैं, डैंड्रफ से बचाते हैं और बालों की ग्रोथ प्रोसेस तेज करते हैं।
4. तिल का तेल (Sesame Oil)- यह तेल बाल बढ़ाने की बहुत सी आयुर्वेदिक दवाइयों में बेस के तौर पर इस्तेमाल होता है। इसके एंटी माइक्रोबायल गुण स्कैल्प इन्फेक्शन, फंगल इन्फेक्शन आदि से दूर रखते हैं। यह बालों को पोषण देता है और इसमें मौजूद विटामिन ई हेयर ग्रोथ में मदद करता है।
5. ऑर्गन ऑयल (Argan Oil)- यह तेल बालों को हाइड्रेट करता है। इसके एंटी ऑक्सीडेंट गुण डैमेज बालों को ठीक करते हैं। विटामिन ई और एफ बालों को तेजी से बढ़ाते हैं और उन्हें घना बनाते हैं। इस तेल से दोमुंहे बालों की समस्या से भी निजात मिलती है। इस तेल को 'लिक्विड गोल्ड (Liquid Gold)' भी कहा जाता है।
6. जोजोबा ऑयल (Jojoba Oil)- मॉइश्चराइज गुण के कारण इस तेल को बालों और त्वचा के लिए बेहद अच्छा माना जाता है। इसका रोजाना इस्तेमाल बालों को फ्रिज्ज़ फ्री (Frizz Free)रखता है और घना बनाता है। यह तेल नई कोशिकाओं को बनाता है जिससे बाल तेजी से बढ़ते हैं।
7. नारियल तेल (Coconut Oil)- सबसे आसानी से मिलने वाला और बेहतर गुणों वाला तेल है। बालों को प्राकृतिक रूप से कंडीशन करता है। इसमें मौजूद विटामिन ई और एंटी ऑक्सीडेंट गुण बालों को मुलायम रखते हैं, टूटने से बचाते हैं और दोमुंहे बाल होने से रोकते हैं। यदि इस तेल में भृंगराज, ब्राह्मी और करी पत्ता मिला दिया जाए तो बहुत कम समय में बाल बढ़ने लगेंगे।

Sunday, 20 August 2017

आयुर्वेद से दमा से बचाव का उपाय

आयुर्वेद से दमा से बचाव का उपाय (Ayurvedic Treatment For Asthma)


आयुर्वेद के अनुसार दमा से बचाव का उपाय (Ayurvedic treatment for Asthma)
अस्थमा के रोगियों को अस्थमा का दौरा कभी भी आ सकता है। यह जानलेवा भी हो सकता है। ऐसे में इससे बचने के उपायों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है। आयुर्वेद के अनुसार अस्थमा से बचने के कुछ आसान उपाय निम्न हैं:
  1. किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचें।
  2. झींकते, खांसते समय रुमाल का प्रयोग करें।
  3. धूल, धुंआ, रुई, जानवरों के पंख, बालों के सम्पर्क में आने से बचें।
  4. फूलों के परागकणों (फूलों में मौजूद तत्वों को) को सांस के साथ अंदर जाने से रोकें।
  5. सुगंधित या कृत्रिम रासायनिक द्रव्यों जैसे परफ्यूम, डियो आदि से परहेज करें।
  6. जुकाम या खांसी होने पर लापरवाही न बरतें, जल्द से जल्द उसका उपचार करें।

खान पान का रखें ध्यान (Diet in Asthma by Ayurveda)
आयुर्वेद के अनुसार अस्थमा में खान-पान पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
  1. हल्का और जल्दी पचने वाला भोजन जैसे मूंग, मसूर की दाल इत्यादि का सेवन करें।
  2. लहसुन, अदरक, मेथी, सोया, परवल, लौकी तरोई, टिंडे आदि का प्रयोग भोजन में अधिक से अधिक करें।
  3. अस्थमा के रोगी के लिए मोटे पिसे आटे की रोटियां, दलिये की खिचड़ी लाभदायक है।
  4. मुनक्का व खजूर का प्रयोग लाभदायक होता है।
  5. हमेशा पीने के लिए गर्म पानी का प्रयोग करेँ।

Thursday, 3 August 2017

चेहरे का सौंदर्य बढ़ाये

चेहरे का सौंदर्य बढ़ाये 




चेहरे का सौंदर्य बढ़ाता है  चेहरे की सुंदरता बढ़ाने में त्वचा का बहुत बड़ा योगदान है | मौसम और त्वचा की प्रकृति के अनुरूप देखभाल करने से त्वचा को स्वस्थ और सुंदर बनाया जा सकता है | अक्सर ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए ब्यूटी पार्लर का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन आप घर पर ही फेस पैक बना सकती हैं (Make Your Own Facepack At Home) और बड़ी आसानी से अपने चेहरे की कांति वापस ला सकती हैं |
जाड़े के दिनों में शुष्क त्वचा (Skin Care In Winter) को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है | शुष्क त्वचा ठंड से जल्द प्रभावित होती है और सूखकर उसमे दरारें पड़ जाती हैं | Homemade face pack for glowing skin in winter in hindi.

शुष्क त्वचा के लिए फेस पैक Homemade Facepack For Dry Skin

एक चम्मच चने के बेसन में थोड़ा शहद और मलाई मिलाकर चेहरे पर लगाएं | अगर आप अंडे की जर्दी लगा सकती हैं तो और बेहतर है | अंडे की जर्दी में दो चम्मच शहद मिलाकर अच्छा सा घोल तैयार करें | इसे चेहरे पर लगाएं और सूख जाने पर धो लें | इससे त्वचा का अच्छा पोषण होता है और नर्मी भी बनी रहती है |
त्वचा का तेल- संतुलन बनाए रखने के लिए रात में चेहरे को अच्छी तरह धो लें, फिर एक चम्मच बादाम के तेल में 4-5 बूंद गिल्सरीन और मलाई मिलाकर लेप करें | आप सिर्फ गिल्सरीन और नीबू का रस भी प्रयोग कर सकती हैं | ऑलिव ऑयल से मालिश करना भी लाभदायक है मगर ध्यान रहे, चेहरे पर मालिश हमेशा नीचे से ऊपर की ओर करना चाहिए | गालों पर गोलाई से मालिश करें |

सामान्य त्वचा के लिए फेस पैक Homemade Facepack For Normal Skin

सामान्य त्वचा को आमतौर पर ज्यादा परेशानी नहीं सहनी पड़ती | इसे हमेशा सामान्य बनाए रखने के लिए आप फेस पैक का इस्तेमाल कर सकती हैं | मसूर की दाल को पानी में भिगो लें, फिर दूध के साथ पीसकर चेहरे पर लेप लगाएं | सूख जाने पर धो लें | कच्चा दूध भी बहुत फायदेमंद है | रात को सोने से पहले दो चम्मच कच्चे दूध में एक चम्मच ग्लिसरीन मिलाकर लगाएं, सुबह धो लें | अंडे के प्रयोग से भी अच्छा फेस पैक तैयार हो सकता है | दूध में अंडा फेटकर हल्दी-बेसन का लेप बनाएं और चेहरे पर लगाएं | इससे चेहरे का रंग भी साफ होगा | हल्दी में बहुत से औषधीय गुण हैं- यह रक्त-शोधक का काम करती है | दही, बेसन और गिल्सरीन का मिश्रण भी सामान्य त्वचा की अच्छी देखभाल कर सकता है |

तैलीय त्वचा के लिए फेस पैक Homemade Facepack For Oily Skin

यदि आपकी त्वचा तैलीय है तो गर्मी के दिनों में अच्छे साबुन का प्रयोग करें | साबुन के बदले चने के बेसन तथा संतरे के छिलके के पाउडर का पर्योग भी कर सकती हैं | इनका गाढ़ा घोल बनाकर चेहरे पर लगाएं और ठंडे पानी से धो लें |
Make winter face pack for glowing skin at home easily. जाड़े के दिनों में तैलीय त्वचा वरदान है, लेकिन मौसम की खुश्की थोड़ा बहुत इसे भी प्रभावित कर जाती है इसलिए इस मौसम में ऐसी त्वचा को भी थोड़ी देखभाल की जरुरत है | इसके लिए आप एक चम्मच संतरे के छिलके का पाउडर लें और उसमे थोड़ा दूध और मलाई मिलाकर चेहरे पर लगाएं | बेसन में दूध और मलाई का फेस पैक भी तैयार कर सकती हैं | सप्ताह में एक बार, अंडे की सफेदी में थोड़ा दूध और एक चम्मच शहद मिलाकर बना हुआ लेप लगाएं | आपकी त्वचा खिल उठेगी |

Friday, 28 July 2017

याददाश्त. बढ़ाने के उपाय

याददाश्त. बढ़ाने के उपाय  Memory Power Increase 
 

आज बाजार में याददास्त बढ़ाने के लिए (Memory Tez Karne Ke Liye) गोलियों से लेकर च्यवनप्राश तथा विशेष प्रकार के दंत मंजन तथा अनेक टानिक आदि प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं | इनके बारे में यह दावा किया जाता है कि इन तरीकों के सेवन से हमारी स्मरण शक्ति बढ़ सकती (Memory Power Can Increase) है, लेकिन यदि स्मरण शक्ति बढ़ाना इतना ही आसान होता, तो हम सब के सब जीनियस इंसान हो जाते |
हम सभी की जिंदगी में प्रायः कुछ न कुछ भूल जाने के क्षण आते रहते हैं | बातचीत  के दौरान आपके साथ भी ऐसा होता होगा कि कोई नाम तो दिमाग में घूम रहा है लेकिन आप उसका नाम बता नहीं पाते या आप ठीक शब्द बोल नहीं पाते | कभी – कभी ऐसा भी होता है कि कहीं पर चाबियां रख कर भूल गए हैं, लेकिन याद नहीं आ रहा है |
लेकिन शायद आपको मालूम होगा कि कुदरत हमेशा अपने ढंग से सोचती और समझती है | जीव विज्ञानियों के अनुसार मनुष्य की इस अधूरी स्मरण शक्ति के पीछे भी एक मकसद होता है | कुछ लोगो के विचार से यदि आप ज्ञान की अमिट छाप चाहते हैं तो यह जरूरी है कि हमारी स्मरणशक्ति भी अधूरी हो | यदि चेतन स्तर पर यदि हम हर बात याद रखते, तो फिर क्रेजी हो जाते | छोटी-छोटी घटनाओं की स्मृति से सब गड़बड़ हो जाता | इसलिए समझदारी इसी में है, कि हम जरूरी बातों को ही याद रखें | इसलिए, इसके बारे में हम आपके लिए कुछ नुस्खे बता रहे हैं (Dimag Tez Karne Ke Nuskhe) , जिससे आप अपनी याददाश्त को बेहतर और सामंजस्यपूर्ण बना सकते हैं –

1. चुस्त-दुरुस्त रहें Health Tips Increasing Memory Power

आप तो जानते ही हैं कि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है | यदि आपकी आयु 40 वर्ष से अधिक है और हफ्ते में चार या पांच बार एरोबिक व्यायाम करते हैं, तो निश्चय ही स्मरणशक्ति की परीक्षा में आप अपनी आयु के उस व्यक्ति को भी मात दे सकते हैं, जो शारीरिक व्यायाम नहीं करता | यदि आप नियमित रूप से व्यायाम नहीं करते तो आप अभी से आलस छोड़ दें | दिमाग के लिए अदभुत टानिक व्यायाम ही होता है | इससे मस्तिष्क की ओर रक्त के प्रवाह में सुधार आता है | साथ ही हमारी सोचने समझने की शक्ति तथा याददास्त अपने आप बढ़ने लगती है |

2. आप दिमागी खेल खेलें Memory Badhane Ke Liye Mental Games Khele

दिमागी खेल खेलने से आपके दिमाग की शक्ति बनी रहती है और आपकी याददाश्त जल्दी कम नहीं होती है | इसके लिए आप क्रासवर्ड खेलें, शतरंज खेलें, इनसे आपकी स्मरण शक्ति तेज होगी | इन खेलों से धीरे-धीरे तथा सूक्ष्म स्तर पर लाभ मिलता है | अब यह आप पर निर्भर करता है कि आपको कौन सा खेल खेलना पसंद है |

3. छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें Concentrate To Increase Memory

इसका मतलब यह है कि आप छोटी-छोटी बातों पर पूरा ध्यान दें | हर नई जानकारी को आत्मसात करें | कुछ लोग इस काम में काफी माहिर भी होते हैं | उदाहरण के रूप में, आपके पास ना जाने कितनी बार ₹50 का नोट आया होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस नोट के पीछे कौन सा चित्र बना है ? जब तक आप संसद भवन की इस चित्र पर ध्यान नहीं देते, तब तक आप अच्छे आब्जर्वर नहीं हो सकते | इसलिए जरूरी है कि आप अपने मानस पटल पर खास-खास चीजों की तस्वीर बना लें |

4. स्मरण शक्ति वर्धक तरीके अपनाएं और लय तुकबंदी में सोचें

फैक्ट्स और जटिल तथा बहुत ज्यादा जानकारी को लय तुकबंदी में याद करें | इससे आपको बहुत ज्यादा मदद मिलेगी | आप भी यह कोशिश करके देखें तो आप पाएंगे इसका जादू सा असर कैसे होता है |

5. लिस्ट बनाएं Make Your List To Memorise

याद रखने वाली बहुत सारी बातें कागज के किसी टुकड़े में संक्षेप में लिख लें | इससे आपकी याददाश्त में यह जानकारी चली जाएगी | इसके साथ ही आपका दिमाग अन्य बातें याद रखने के लिए फ्री हो जाएगा | आप की याददाश्त का भंडार सीमित होता है | लिस्ट बना लेने से इस पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा |

6. अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर याद रखें

जो कुछ घटित होता है, वह अन्य घटनाओं से अलग-थलग नहीं होता है | इन घटनाओं पर ध्यान दें, बड़े सहज ढंग से किसी घटना विशेष के डिटेल्स दिमाग में आने लगेंगे | यदि आपका दिमाग साथ न भी दे, तब भी ऐसे तथ्य किसी भी सामान्य ज्ञान की पुस्तक में ढूंढे जा सकते हैं | इस प्रकार की घटनाओं को परस्पर जोड़ने से कई बार हमारा दिमाग सही दिशा में सोचने लगता है | इससे अतीत से जुड़ी घटनाएं याद करने में मदद मिलती है |

7. अपने आसपास के बारे में सोचें

यदि हम चाहते हैं, कि हमारा स्मृति तंत्र सही ढंग से कार्य करता रहे, तो अपने चारों ओर घटित हो रही घटनाओं पर पूरा ध्यान दें | इससे इस बात की गुंजाइश रहती है, कि यादों की गुम कड़ी तुरंत सॉल्व हो जाए | जितना अधिक घटनाओं को जोड़ते जाएंगे, आपको सही उत्तर मिलता जाएगा | हम अपनी मंजिल के निकट आते जाएंगे |

8. ध्यान लगाएं Meditation To Increase Memory

ध्यान लगाने से मन एकाग्र होता है और इससे हमें शांति भी मिलती है | मस्तिष्क बाधाओं से मुक्त होता है | जिसके परिणाम स्वरुप मन को आराम मिलता है | हम चेतना के तनावमुक्त स्तर पर पहुंच जाएंगे | आगे बढ़े और प्रयोग करके देखें | ध्यान लगाना मुश्किल जरूर है, पर किसी योग्य गुरु की मदद लेने से इसमें कामयाबी जरूर हासिल की जा सकती है

9. खूब पढ़ें और लगातार पढ़ें Yaddasht Badhane ke Liye Padhe

यदि आप अभिव्यक्ति के लिए शब्द ढूंढ रहे हैं और शब्द साथ नहीं दे रहे हैं, और ऐसा काफी होता है, तो आपको अधिक से अधिक पढ़ने की जरूरत है | आप जितना पढ़ सकते हैं, उतना पढ़ें | उत्तम साहित्य पढ़ें, आनंद लें और उसमें डूब जाएं | जल्दी ही आपके अंतःकरण से शब्दों का प्रभाव होने लगेगा | कई प्रसिद्ध वक्ताओं ने इस तरीके को अपनाया है और उसमें उनको सफलता भी मिली है |

10. शांत रहें Yaddasht Badhane Ke Liye Shant Rahe

दबाव, चिंता, घबराहट का आपकी याददाश्त पर बहुत बुरा असर पड़ता है | अनेक मेघावी छात्र इन्हीं कारणों से परीक्षा में अच्छे अंक नहीं ला पाते | इसलिए शांत रहें और सफलता की सीढ़ियां चढ़ते जाएं | यदि आप चिंतित रहते हैं, तो योग करें | जब खुद को तनाव से घिरा पाए तो दो चार बार लंबी गहरी सांस लें | सुबह-शाम सैर के लिए जाएं और थक जाएं तो आराम करें |

11. अल्कोहल से दूर रहें Avoid Alcohol

अधिक शराब पीना और दूसरे नशे करने वाले पदार्थों का सेवन करना अपने पैर में कुल्हाड़ी मारने के समान होता है | इससे शरीर के साथ-साथ मन-मस्तिष्क पर भी बुरा असर पड़ता है | विस्मरण की अवस्था में ही कई बार व्यक्ति झूठ के कटघरे में खड़ा हो जाता है | ऐसी स्थिति आने से बचें और शराब की लत से खुद को बचाए रखें |

12. संतुलित आहार लें Food To Eat To Increase Memory Power

अनुसंधान से पता चलता है कि विटामिनों से भरपूर संतुलित आहार लेने से याददाश्त, शब्द प्रवाह आदि में सुधार आता है | बी कांप्लेक्स के विटामिन, विशेषता नियासिन और बीटा केरोटिन खास तौर पर उपयोगी है |