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Thursday, 27 July 2017

एनीमिया खून की कमी का उपचार जाने

एनीमिया खून की कमी  का उपचार जाने  

मानव के शरीर में लौह की मात्रा उसके वजन के अनुसार तीन से पांच ग्राम तक हो सकती है। लेकिन जब इसकी मात्रा शरीर में कम होने लगती है, तब हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन का बनना कम हो जाता है, इसलिए आज हम जानेंगे एनीमिया का आयुर्वेदिक उपचार। एनीमिया के कारण शरीर में लौह की मात्रा  की कमी आ जाती है। इसका सबसे बड़ा नुकसान हमारे शरीर को यह भी होता है कि इससे शरीर में ऑक्सीजन का आवाजाही कम हो जाती है। इसी कारण शरीर को र्याप्त उर्जा नहीं मिलती, जिसके कारण व्यक्ति को एनीमिया अर्थात् शरीर में खून की कमी हो सकती है।
एनीमिया लौह तत्व, विटामिन बी 12, फोलिक एसिड की कमी के कारण होता है। यह खून की कमी पुरुषों के मुकाबले औरतों में अधिक देखने को मिलती है। एनीमिया होने पर शरीर में थकान, कमजोरी, त्वचा में पीलापन, लगातार सिर में दर्द आदि लक्षण दिखाई देते हैं। अगर आप एनीमिया से ग्रस्त हैं तो ऐसे में जब आप आयुर्वैदिक उपचार करें, तो आप इससे आसानी से निजात पा सकते हैं। शरीर में खून की कमी आ जाने पर हमें ऐसे आहार का सेवन करना चाहिए, जिससे हमारा खून जल्दी ही बढ़ने लगे जैसे कि मूंगफली के दानों को गुड के साथ चबा चबा कर खाना, पालक, सरसों, मेथी, हरा धनिया, पपीता, अमरुद, सेब, नींबू आदि का सेवन करें।

एनीमिया का आयुर्वेदिक उपचार

1. सेब और चुकन्दर का रस

चुकन्दर में फोलिक एसिड की उच्च मात्रा होती है और सेब में लौह तत्व होते हैं। यह दोनों ही खून की कमी को दूर करते हैं। इसके लिए एक कप चुकन्दर के रस और एक कप सेब के रस में दो चम्मच शहद का रस कर नियमित रूप से दिन में दो बार पीने से एनीमिया ठीक हो जाता है।

2. तिल और शहद

एक चम्मच तिल के बीज को दो घंटे तक पानी में भिगोकर रखें, पानी को छानकर बीज का पेस्ट तैयार कर लें। बाद में उसमें एक चम्मच शहद को मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से एनीमिया में राहत मिलती है।

3. पालक का सेवन

पालक में भरपूर मात्रा में लौह तथा विटामिन बी 12 पाया जाता है, इसके साथ ही इसमें फोलिक एसिड की भी उच्च मात्रा मौजूद होती है। पालक का सेवन करने से खून की कमी पूरी हो जाती है, इसके लिए हमें पालक का सूप बनाकर, या पालक का साग बनाकर भी इसका सेवन कर सकते हैं।

4. अनार का सेवन

अनार में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट के साथ-साथ आयरन और कैल्शियम की भी उच्च मात्रा होती है। इसका सेवन करने से शरीर में हीमोग्लोबिन तेजी के साथ बढ़ता है। अनार शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा को तेजी से बढ़ाकर रक्त संचार को ठीक रखता है। एनीमिया होने पर खाली पेट अनार का सेवन करना चाहिए और साथ में प्रतिदिन अनार का जूस पीना चाहिए।

5. टमाटर का सेवन

शरीर में आयरन की मात्रा लेने के साथ यह भी जरूरी होता है कि आपके शरीर में आयरन को सोखने की क्षमता हो। इसमें टमाटर एक अहम भूमिका को निभाता है। ऐसे में हमें हर रोज दो कच्चे टमाटरों का सेवन आवश्य करना चाहिए। आप टमाटर का रस खाने में और सलाद के रूप में भी कर सकते हैं।

6. खजूर

खजूर आयरन का एक अच्छा स्रोत होता है। सौ ग्राम खजूर में 90 मिलीग्राम आयरन की मात्रा मौजूद होती है। दो खजूर को एक गिलास दूध में रात को छोड़ दें और सुबह खजूर को खाली पेट चबाकर खाएं और बचा हुआ दूध भी पी लें। इससे आपको एनीमिया में बहुत ही राहत मिलती है।

7. किशमिश

एनीमिया का आयुर्वेदिक उपचार किशमिश में भी छिपा है क्योंकि किशमिश में आयरन, प्रोटीन, फाइबर, सोडियम जैसे उच्च तत्व पायें जाते हैं। यह एनीमिया के लिए एक बेहतर उपचार होता है, इसके लिए रात को एक कप पानी में 10 से 15 किशमिश भिगों दें। सुबह इस किशमिश में शहद मिलाकर इसका सेवन करें और बचा हुआ पानी पी लें।

8. शहद

शहद लौह और विटामिन बी 12 का उच्च स्रोत माना जाता है। शहद का नियमित रूप से सेवन करने से एनीमिया की कमी को पूरा किया जा सकता है।

Wednesday, 26 July 2017

( मधुमेह ) का सबसे बढ़िया और सबसे सरल आयुर्वेदिक उपचार ।

( मधुमेह ) का सबसे बढ़िया और सबसे सरल आयुर्वेदिक उपचार ।


मधुमेह या चीनी की बीमारी एक खतरनाक रोग है। रक्त ग्लूकोज (blood sugar level ) स्तर बढा़ हूँआ मिलता है, यह रोग मरीजों के (रक्त मे गंदा कोलेस्ट्रॉल,) के अवयव के बढने के कारण होता है। इन मरीजों में आँखों, गुर्दों, स्नायु, मस्तिष्क, हृदय के क्षतिग्रस्त होने से इनके गंभीर, जटिल, घातक रोग का खतरा बढ़ जाता है।
भोजन पेट में जाकर एक प्रकार के ईंधन में बदलता है जिसे ग्लूकोज कहते हैं। यह एक प्रकार की शर्करा होती है। ग्लूकोज हमारे रक्त धारा में मिलता है और शरीर की लाखों कोशिकाओं में पहुंचता है। pancreas (अग्न्याशय) ग्लूकोज उत्पन्न करता है इनसुलिन भी रक्तधारा में मिलता है और कोशिकाओं तक जाता है।
मधुमेह बीमारी का असली कारण जब तक आप लोग नही समझेगे आपकी मधुमेह कभी भी ठीक नही हो सकती है जब आपके रक्त में वसा (गंदे कोलेस्ट्रोल)LDL की मात्रा बढ जाती है तब रक्त में मोजूद कोलेस्ट्रोल कोशिकाओ के चारों तरफ चिपक जाता है !और खून में मोजूद जो इन्सुलिन है कोशिकाओं तक नही पहुँच पाता है (इंसुलिन की मात्रा तो पर्याप्त होती है किन्तु इससे द्वारो को खोला नहीं जा सकता है, अर्थात पूरे ग्लूकोज को ग्रहण कर सकने के लिए रिसेप्टरों की संख्या कम हो सकती है)
वो इन्सुलिन शरीर के किसी भी काम में नही आता है जिस कारण जब हम शुगर level चैक करते हैं शरीर में हमेशा शुगर का स्तर हमेशा ही बढा हुआ होता है क्यूंकि वो कोशिकाओ तक नहीं पहुंची क्योंकि वहाँ (गंदे कोलेस्ट्रोल)LDL VLDL जमा हुआ है जबकि जब हम बाहर से इन्सुलिन लेते है तब वो इन्सुलिन नया-नया होता है तो वह कोशिकाओं के अन्दर पहुँच जाता है !
तो ऐसी स्थिति मे हम क्या करें ??
राजीव भाई की एक छोटी सी सलाह है कि आप insulin पर ज्यादा निर्भर ना रहें ! क्यूंकि ये insulin डाईब्टीज से भी ज्यादा खराब है side effect इसके बहुत हैं !! तो आप ये आयुर्वेद की दवा का फार्मूला लिखिये !
और जरूर इस्तेमाल करें !!
100 ग्राम (मेथी का दाना )ले ले इसे धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
100 ग्राम (तेज पत्ता ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
150 ग्राम (जामुन की गुठली )लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
250 ग्राम (बेलपत्र के पत्ते ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें !
_________________
तो
मेथी का दना – 100 ग्राम
तेज पत्ता ——- 100 ग्राम
जामुन की गुठली -150 ग्राम
बेलपत्र के पत्ते – 250 ग्राम
तो इन सबका पाउडर बनाकर इन सबको एक दूसरे मे मिला लें ! बस दवा तैयार है !!
इसे सुबह -शाम (खाली पेट ) 1 से डेड चम्मच से खाना खाने से एक घण्टा पहले गरम पानी के साथ लें !!
2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन करें !! (सुबह उठे पेट साफ करने के बाद ले लीजिये )
____________________________
अगर आप इसके साथ एक और काम करे तो सोने पे सुहागा हो जाएगा ! और ये दवा का असर बहुत ही जल्दी होगा !! जैसा कि आप जानते है शरीर की सभी बीमारियाँ वात,पित ,और कफ के बिगड़ने से होती हैं !! दुनिया मे सिर्फ दो ही ओषधियाँ है जो इन तीनों के सतर को बराबर रखती है !!

Monday, 24 July 2017

खजुर खाने के लाभ जाने

खजुर खाने के  लाभ  जाने 

खजूर शरीर को स्वस्थ रखने और मजबूत बनाता है। खजूर में कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है। इसमें बहुत ज़्यादा पौष्टिकता होती है। अगर पाचन शक्ति अच्छी हो तो खजूर खाना ज्यादा फायदेमंद है। 100 ग्राम खजूर से रोजाना की इतनी फीसदी ज़रूरत पूरी होती है।
-डायटरी फाइबर
-पोटैशियम
-विटामिन बी6
-मैग्नीशियम
-आयरन
-कैल्शियम
इससे सेहत को फायदे
1- इसमें बहुत अधिक मात्रा में डायटरी फाइबर पाए जाते हैं। इससे कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है। इससे पाचन भी ठीक रहता है।
2- इसमें टैनिन नामक एंटी-ऑक्सीडेंट भी पाया जाता है। इससे संक्रमण दूर करने में मदद मिलती है। यह रक्त के स्राव को भी रोकता है।
3- यह विटामिन ए का बहुत अच्छा स्रोत है। इससे आंखों की रोशनी तेज होती है। इससे त्वचा की समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।
4- इसमें बीटा कैरोटिन नामक फ्लेवोनॉइड्स पाए जाते हैं। यह कोलोन, ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और
लंग कैंसर से बचाव करने में भी मददगार होता है।
5- इसमें आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इससे हीमोग्लोबिन की कमी को दूर किया जा
सकता है। इसके साथ ही यह कैल्शियम का भी अच्छा स्रोत होता है। इससे हड्डियां भी
मजबूत होती हैं।
6- सूखा हुआ खजूर आमाशय को बल प्रदान करता है।
7- खजूर दिल को ताकतवर बनाता है। यह शरीर में रक्त वृद्धि करता है।
8- साइटिका रोग से पीड़ित लोगों को इससे विशेष लाभ होता है। खजूर के सेवन से दमे के रोगियों के फेफड़ों से बलगम आसानी से निकल जाती है।
9- लकवा और सीने के दर्द की शिकायत को दूर करने में भी खजूर मददगार साबित होता है।
10- जुकाम से परेशान रहते हैं तो एक गिलास दूध में पांच दाने खजूर डालें। पांच दाने काली मिर्च, एक दाना इलायची और उसे अच्छी तरह उबाल कर उसमें एक चम्मच घी डाल कर रात में पी लें। सर्दी-जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा।

Saturday, 22 July 2017

हार्निया का उपचार जाने

हार्निया का उपचार जाने 



हार्निया का उपचार  आमतौर पर हार्निया होने का कारण पेट की दीवार का कमजोर होना है | पेट और जांघों के जोड़ वाले भाग में जहां पेट की दीवार कमजोर पड़ जाती है वहां आंत का एक गुच्छा उसमें छेद बनाकर निकल आता है | आंत का कुछ भाग किसी अन्य भाग से भी जहां पेट की दीवार कमजोर होती है, बाहर निकल सकता है | परंतु ऐसा बहुत कम होता है | आंत का गुच्छा बाहर निकलने से उस स्थान पर दर्द होने लगता है | इसी को हार्निया अथवा आंत्रवृद्धि कहते हैं |

हार्निया का कारण Causes of Hernia

अत्यधिक श्रम, अपनी शक्ति से अधिक भारी वस्तु उठाना, निरंतर खांसते रहना अथवा शौच के समय मल त्यागने के लिए जोर लगाने से भी हर्निया हो जाता है | अधिक मोटे व्यक्ति को पेट पर अधिक जोर डालने से भी हार्निया होने की संभावना रहती है | ऑपरेशन होने के बाद भी हार्निया होने की संभावना रहती है | गर्भावस्था में पेट पर जोर पड़ने से भी हार्निया हो सकता है | परंतु यह रोग सामान्यतया पुरुषों को अधिक होता है |

हार्निया के लक्षण Symptoms of Hernia

हार्निया की प्रारंभिक स्थिति में पेट की दीवार में कुछ उभार सा पैदा हो जाता है | इस आगे बढ़ी हुई आंत को धीरे से पीछे भी धकेला जा सकता है | परंतु इसे अधिक जोर लगाकर पीछे धकेलने का प्रयत्न नहीं करना चाहिए |

हार्निया का घरेलू उपचार Hernia Ka ilaj in Hindi

1. यदि आगे बढ़ी आंत को आराम से पीछे धकेलकर अपने स्थान पर पहुंचा दिया जाए तो उसे उसी स्थिति में रखने के लिए कसकर बांध दिया जाता है | यह विधि कारगर न हो सके तो ऑपरेशन करना पड़ता है |
2. हार्निया के रोगी के लिए आवश्यक है कि वह कब्ज न होने दे वर्ना मल त्यागते समय उसे जोर लगाने की आवश्यकता पड़ेगी |
3. अपच होना भी हार्निया के रोगी के लिए हानिकारक है |
4. पेट यदि बहुत बढ़ा हुआ हो तो उसे भी घटाने का प्रयत्न करना चाहिए |
5. अरंडी के तेल को एक कप दूध में डालकर पीने से हर्निया ठीक हो जाता है | इसका प्रयोग एक मास तक करें |
6. टमाटर का रस, थोड़ा नमक और कालीमिर्च मिलाकर प्रात:काल पीने से जहां अन्य अनेक लाभ होते हैं वहीं हर्निया ठीक होने में भी सहायता मिलती है |
7. कॉफी के प्रयोग से भी बढ़ी हुई आंत का फोड़ा ठीक हो जाता है |

Friday, 21 July 2017

आँखों के काले घेरों से छुटकारा पाएँ

  आँखों के काले घेरों से छुटकारा पाएँ


आँखों के नीचे काले घेरे महिलाओं और पुरुषों दोनों में आम शिकायत है, हालाँकि कभी-कभी ये बच्चों में भी दिखाई पड़ते हैं। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, त्वचा पतली होती है और कोलेजन की क्षति होती है, जिससे कभी-कभी आँखों के नीचे की रक्तवाहिनियाँ दिखाई देने लगती हैं जिस के कारन त्वचा गहरी दिखाई पड़ने लगती है।

काले घेरे होने का कारन किया है?

यह अनुवांशिकता, जीन, थकावट और शरीर में जल की कम मात्रा का मिला-जुला रूप है, लेकिन लम्बे समय तक बने रहने वाले काले घेरों को उत्पन्न करने का सबसे बड़ा कारण है भारतीय जनता की जातीय प्रकृति के कारण त्वचा में होने वाला पिगमेंट का अधिक जमाव। धूप की चपेट काले घेरों की संभावना को बढ़ाती है। 

इसके साथ ही, काले घेरों का सम्बन्ध फैली हुई रक्तवाहिनियों और बढ़ती हुई उम्र से होता है – जिसके कारण त्वचा पतली होती है और क्षेत्र को गहरा कर सकती है। दुर्भाग्यवश, इन्हें पूरी तरह मिटा पाना संभव नहीं है। हालाँकि आप इनके प्रभावों को कम कर सकते हैं और उनके उत्पन्न होने के कारणों को जानकर तथा उचित उपाय ढूँढकर काले गहरे घेरों से छुटकारा पा सकते हैं।

काले घेरों का इलाज कैसे करें?

  • बचाव:एसपीएफ़ 30 के सनस्क्रीन का प्रतिदिन उपयोग करें। नीचे आधार पर मॉइस्चराइजर और उसके ऊपर कंसीलर लगाकर भी सुरक्षा परत का कार्य लिया जा सकता है।
  • आहार सम्बन्धी परिवर्तन:यदि आपको काले घेरों के साथ फूली हुई आँखें भी रहती हैं तो नमक का कम सेवन, सूजन को कम करने में मदद करता है।
  • आँखों को मसलें नहीं, क्योंकि मसलना धब्बों का रंग गहरा करता है।
  • आँखों को चमकाने वाले तत्व का प्रयोग हर रात्रि करने से आँखों के आस-पास की रेखाएँ कम होती हैं और काले धब्बों से धीरे-धीरे छुटकारा पाने में मदद मिलती है।
  • केमोमिल टी, पीने के बाद, इसके बैग को ना फेकें। इन्हें ठन्डे होने के लिए फ्रीज में रख दें और सप्ताह में तीन बार 10-10 मिनट के लिए अपनी आँखों पर रखें, जिससे आपको काले घेरों से छुटकारा पाने में मदद मिलेगी।
  • आलू में प्राकृतिक रूप से स्वच्छ करने के गुण होते हैं जो काले घेरों को हल्का करने में मदद करते हैं। ये आँखों के आस-पास के फूलेपन से छुटकारा पाने में भी मदद करते हैं।
  • यदि बाकी सब उपचार असफल हो जाते हैं तो त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह ली जानी चाहिए और आँखों के निचले हिस्से के लिए उनके क्लिनिक में उपलब्ध उपचार किया जाना चाहिए

Thursday, 20 July 2017

शतावरी के चमत्कारी फायदे जाने

शतावरी के चमत्कारी फायदे जाने 


शतावरी का उल्लेख आयुर्वेद में किया जाता है, क्योंकि यह एक औषधीय पौधा है। इसका उपयोग कई रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। आज हम शतावरी के फायदे के बारे में आपको बताएंगे, लेकिन उससे पहले इसके गुणों के बारे में जानना भी आपके लिए अति आवश्यक हैं। शतावरी में ऐसे कई तरह के गुण होते हैं, जो हमारी हर बीमारी को ठीक कर सकते हैं। शतावरी एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। इसके फूल मंजरियों में एक से दो इंच लंबे एक या गुच्छे में लगते हैं। इसकी लता खूबसूरत होने के कारण लोग इसे अपने घरों के गमले में लगाना पसंद करते हैं।
आयुर्वेद के आचार्य के अनुसार शतावरी पुराने से पुराने रोगी के शरीर में रोग के खिलाफ लड़ने की क्षमता प्रदान करती है। आयुर्वेद में शतावरी की पत्तियों और जड़ों को शुक्रजनन, शीतल, मधुर और द्रिव्य रसायन माना जाता है। महर्षि चकर ने भी शतावर को बल्य और वय: स्थापक माना है। शोध में भी शतावरी की जड़ को ह्रदय रोगों के लिए प्रभावी मान चुके हैं।
शतावरी गुणों में भारी होने के साथ-साथ स्वाद में कड़वी व मधुर, रसायन गुणों में भरपूर वायु और पित्त नाशक, पुरुषों में शक्ति, स्त्रियों के स्तनों में दूध बढ़ाने वाली, नेत्र ज्योति, स्मृति, पाचन, बुद्दि बढ़ाने वाली, स्नायु रोग नाशक, गुर्दे की बीमारी आदि में लाभकारी होती है। आइये जानते है शतावरी के फायदे के बारे में।

शतावरी के फायदे

1. नींद न आने की समस्या

पूरी नींद लेना सेहत के लिए आवश्यक है। ऐसे में यदि आपको नींद को लेकर किसी तरह की परेशानी हैं तो शतावरी की जड़ को खीर के रूप में पका लें और इसमे थोड़ा गाय का घी डालें। इससे आप तनाव से मुक्त हो जायेगें और आपको अच्छी नींद भी आयेगी।

2. अतिरिक्त वजन कम करें

महिलाओं में मासिक के दौरान पानी की मात्रा अधिक लेने के कारण वजन अधिक बढने लगता है। ऐसे में यदि महिलाएं शतावरी का सेवन करती है तो वो अपने वजन को कम कर सकती है।

3. माइग्रेन

शतावरी की ताज़ी जड़ को लें और उसे मोटा मोटा कूट लें। अब इसका रस निकाल लें शतावरी का रस और बराबर मात्रा में तिल का रस लें और इसे पकाएं। इस मिश्रण का इस्तेमाल करने से माइग्रेन जैसे सिर दर्द में लाभ मिलता है।

4. ब्रेस्ट मिल्क बढाएं

प्रसूता माता को यदि दूध न आ रहा हो या फिर उसे दूध कम आ रहा हो, तब शतावरी की जड़ों का चूर्ण उसे दिन में कम से कम चार बार लेते रहना चाहिए।

5. मधुमेह

शतावरी के फायदे में एक फायदा यह है कि शतावरी मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद होती हैं। मधुमेह के रोगियों को शतावरी की जड़ों के चूर्ण का सेवन शक्कर युक्त दूध के साथ करना चाहिए।

6. शक्ति वर्धक

शतावरी हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करता है। इसके लिए शतावरी के पत्तों का रस दो चम्मच दूध में मिलाकर पीना चाहिए।

7. पेशाब में खून

अगर आपके पेशाब में खून आता है तो आपको शतावरी का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। इससे आपके पेशाब में खून आने की समस्या ठीक हो जाएगी।

8. प्रदर रोग

नियमित रूप से तीन दिन तक शतावरी का चूर्ण लगभग पांच से दस ग्राम की मात्रा में शुद्द घी में डालकर चाटने से प्रदर रोग से मुक्ति मिल जाएगी।

9. बुखार और जलन

शतावरी ठंडी होने के कारण बुखार, जलन और पेट के अल्सर को दूर करने में सहायक होती है।

10. बीमारियों का नाश करे

यह ऐसी जडी बुटी है जो टाइफाइड, हैजा, बुखार ईकोलाई से लडती है। यह बैक्टीरिया शरीर में डायरिया और मतली पैदा करते हैं।

11. सुन्दरता निखारे

शतावरी में विटामिन ए मौजूद होता है जो हमारी त्वचा को सुंदर बनता है। इसका नियमित रूप से इस्तेमाल करने से चेहरे की झुर्रियां साफ हो जाती है।

12. घाव भरे

शतावरी की पत्तियों की कलख बनाकर घाव वाले स्थान पर लगायें। इससे घाव जल्दी भरकर ठीक हो जाता है।

Wednesday, 19 July 2017

लौंग खाने के फायदे जाने

लौंग खाने के  फायदे जाने 


लौंग का प्रयोग सदियों से आयुर्वेदिक औषधियों के तौर पर किया जाता रहा है। लौंग कई तरह की गंभीर बीमारियों को जड़ से खत्‍म कर सकता है। लौंग एक प्रकार का मसाला है। इस मसाले का उपयोग भारतीय पकवानो मे बहुतायत रूप में किया जाता है। अगर प्रतिदिन लौंग का अलग-अलग तरीके से सेवन किया जाए तो इससे आपको कई तरह की बीमारियों में लाभ मिलेगा। आज हम आपको लौंग खाने से दूर होने वाली उन 10 बीमारियों के बारे में बता रहे हैं, जिनसे शायद आप अंजान होंगे।

लौंग खाने के ये हैं आश्‍चर्यजनक फायदे


1. लौंग को मुंह में रख कर उसका रस चूसने से खांसी ख़त्म होती है। जब तक मुंह में लोंग रहती है तब तक खांसी बंद ही रहती है।
2. लौंग को मुंह में रख कर चूसने से मुंह और श्वास की बदबू दूर हो जाती है।
3. लौंग के तेल की कुछ बुंदे किसी स्वच्छ कपडे के टुकड़े पर टपकाकर, उस कपडे को बार-बार सूंघने से प्रतिषय (जुकाम) की समस्या ठीक हो जाता है साथ ही नाक भी बंद नहीं होती है, और नाक अगर बंद हो तो खुल जाती है।
4. लौंग को पानी के साथ पीसकर 100 ग्राम पानी में मिलाकर, छानकर मिश्री मिलाकर पिने से ह्रदय की जलन विकृति दूर होती है। पेट में जलन होना बंद हो जाती है।
5. वात विकार व जोड़ों के दर्द में लौंग का तेल मलने से पीड़ा ख़त्म होती है।
6. लौंग को पानी के साथ पीसकर हलके गर्म पानी में मिलाकर पिने से जी मचलना बंद हो जाता है और ज्यादा प्यास लगना भी बंद हो जाती है।
7. लौंग के तेल की एक दो बुंदे बताशे पर डालकर खाने से हैजे की विकृति दूर हो जाती है।
8. लौंग को बकरी के दूध में घीसकर, नेत्रों में काजल की तरह लगाने से रतोंधी रोग ठीक हो जाता है।
9. लौंग और चिरायता दोनों बराबर मात्रा में पानी के साथ पीसकर पिलाने से बुखार ख़त्म हो जाता है।
10. एक रत्ती लौंग को पीसकर, मिश्री की चाशनी में मिलाकर चाटकर खिलाने से गर्भवती महिलाओं की उल्टियां बंद हो जाती है।

Tuesday, 18 July 2017

स्वस्थ रहने के चमत्कारिक फायदे

स्वस्थ रहने के चमत्कारिक  फायदे 


हम सभी लोगो ने यह कहावत तो जरूर ही सुनी होगी यानि की स्वस्थ शरीर ही मनुष्य का सबसे बड़ा खजाना होता है । एक सुखी स्वस्थ जीवन के लिए तन और मन दोनों का स्वस्थ होना जरुरी है । अगर हम शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ रहेगे , तभी हम अपने आप को सार्वजनिक एवं निजी जीवन में सफल देख पाएंगे । इसके विपरीत एक अस्वथ इन्सान हमेशा तनाव ग्रस्त हताश और परेशान दिखता है । इसीलिए अगर हमे अपने जीवन का पूरा आनंद उठाना है , तो हमे अपनी सेहत का ख्याल रखना अत्यंत ही आवश्यक है ।
जिस तरह से अच्छा घर,पैसा ,गाड़ी हमारे लिए जरुरी हैं, उसी तरह से एक Healthy Life Style को maintain करना भी बहुत ही जरुरी हैं, क्यूंकि हम स्वस्थ्य रहेंगे तभी इन चीजो का सही ढंग से उपयोग कर पाएंगे । आइये कुछ Basic के बारे में जाने 

Basic and Important Healthy Life Style Tips In Hindi

रोजमर्रा के आदतों में थोड़ा बहुत सुधार करके एक स्वस्थ जीवन की परिकल्पना कर सकते है । दिनचर्या से जुडी स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिएऔर उपयोगी मंत्र
पानी पीने के तरीके और नियम
☛ धरती पर पानी अमृत के समान है । पानी हमारे body को detoxify करने में काफी मदद करता है । इसलिए कोशिस करे की आप पानी प्रचूर मात्रा में पिए । पानी की मात्रा अवस्था के अनुसार ज्यादा कम हो सकती है । लेकिन चिकित्सको के अनुसार एक स्वस्थ इंसान को 10-15 ग्लास पानी पीना अनिवार्य है ।
☛ खड़े -खड़े पानी पीने से घुटनों में दर्द की बीमारी (pain in knees) होती है इसलिए खाना पीना बैठ कर करना चाहिए।
☛ ज्यादा ठंडा पानी न पिए इससे आपके ह्रदय और पाचन शक्ति पर बुरा असर पड़ता है । इसलिए अगर सम्भव हो तो हल्का गर्म पानी पिए अन्यथा सामान्य पानी का ही उपयोग करे ।
☛ सुबह उठते ही कम से कम दो ग्लास सामान्य पानी पिए । रात में तांबे के बर्तन में रखा हुआ पानी सुबह के समय में पीना बहुत ही उपयोगी है ।
☛ खाना खाने से आधा घंटा पहले पानी पीएं और भोजन के एक घंटा बाद पानी का सेवन करें। सोने से पूर्व भी एक गिलास पानी पीना चाहिए।
☛ पानी कभी भी अधिक मात्रा में एक साथ न पीएं। बेहतर होगा घूंट-घूंट कर पानी पीएं
☛ भोजन के बीच में पानी पीने से पाचन तंत्र में गड़बड़ हो सकती है।
नींद की मात्रा व गुणवत्ता । Early to Bed and Early to Rise
☛ early to bed and early to rise यानि की उचित समय से सोना और जगना । यानि की सूर्योदय से पहले उठना और रात्रि में खाने के 1.30 – 2 घंटे बाद ही सोना चाहिए ।
☛ नींद की मात्रा व गुणवत्ता पर ध्यान देना जरुरी है रात्रि में सोने का अधिकतम समय सीमा 10-11 और सुबह 4-5 के बीच होनी चाहिए । इस तरीके आप 6-7 घंटे की नींद आराम से maintain कर सकते है । 6-7 घंटे की नींद का अंतराल होना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही जरुरी हैं ।
☛ कभी भी बेड से सीधे न उठें। पहले साइड में करवट लें, फिर बैठें और उसके बाद उठें।
☛ पेट के बल सोने से बचना चाहिए,पीठ के बल सोएं अथवा बाये या दायें करवट सोये
☛ गद्दा सख्त होना चाहिए । तकिया बहुत सॉफ्ट या हार्ड नहीं होना चाहिए।
☛ रात्री में सोने से पूर्व दाँतों की सफाई, नैत्रों की सफाई एवं पैरों को शीतल जल से धोकर सोना चाहिए
☛ रात्री में शयन से पूर्व अपने किये गये कार्यों की समीक्षा कर अगले दिन की कार्य योजना बनानी चाहिए। तत्पश्चात् गहरी एवं लम्बी सहज श्वास लेकर शरीर को एवं मन को शिथिल करना चाहिए। शान्त मन से अपने दैनिक क्रियाकलाप, तनाव, चिन्ता, विचार सब परात्म चेतना को सौंपकर निश्चिंत भाव से निद्रा की गोद में जाना चाहिए।
स्वास्थ्यप्रद भोजन | Healthy Diet Plan in Hindi
☛ भोजन सादा करो एवं उसे प्रसाद रूप में ग्रहण करो, शांत, प्रसन्न और निश्चिन्तता पूर्वक करो और उसे अच्छी तरह चबाचबा कर खाओ। खाते समय न बात करो और न हंसो। एकाग्र चित्त होकर भोजन करना चाहिए।
☛ खाना हमेशा संतुलित मात्रा में खाएं अर्थात भूख से कम ही खाएं।
☛ भोजन के तुरन्त बाद दौड़ना, तैरना, नहाना, मैथुन करना स्वास्थ्य के बहुत हानिकारक है।
☛ स्वस्थ और पौष्टिक आहार का सेवन करे, जंक और फ़ास्ट फूड जैसे चीजो कम खाये । वैसे कोशिस तो यही होनी चाहिए की न ही खाये
☛ प्रोस्सेड फूड की जगह ताजे फल-सब्जियों को तवज्जो दे ।
☛ सम्भव हो तो एक दिन व्रत यानि की उपवास अवश्य रखे जिससे आपका liver detoxify होकर recover हो सके
☛ दिन भर energetic रहने के लिए सुबह का नाश्ता बहुत जरुरी होता हैं, इसे कभी miss न करे । नाश्ते के रूप में अंकुरित अनाज ,पोहा, उपमा, वीट फ्लेक्स आदि में से लें सकते हैं, साथ ही 1 गिलास दूध अथवा फ्रूट जूस को अपने ब्रेकफास्ट में शामिल करे ।
☛ लंच में चावल, दाल, सलाद, दही व सब्जियां को शामिल करें
☛ देर रात डिनर में गरिष्ट खाना खाने से बचे और सोने से 1.5-2 घंटे पहले डिनर ले ले ।
सक्रिय रहे | Be Active
☛ अपने दिनचर्या में कुछ समय व्यायाम,योग,प्रणायाम तथा ध्यान के लिए अवश्य रखे । इसके लिए आप तैराकी, जॉगिंग, साइकिलिंग, स्किप्पिनंग (रस्सी कूदना) जैसे आसान अभ्याश कर सकते है
ब्रह्मचर्य जीवन का पालन
☛ विवाह से पूर्व ब्रह्मचर्य जीवन निर्वहन करे । नहीं तो पुरुषो और स्त्रियो में सेक्स संभन्धी समस्या का सामना करना पड़ सकता है जिसमे गर्भधारण और शुक्राणु की समस्या आम है ।

Important Health tips 

☛ सिगरेट,शराब घुटका जैसे नशीली और संवेदलशील पदार्थो का सेवन बिल्कुल भी न करे ।
☛ Improve immunity power, बेहतर रोग प्रतिरोधी क्षमता बीमारियों की संभनावो को कम करती है
☛ weight को control में रखना जरुरी है ध्यान रखे की हमारा शरीर न तो overweight हो और न ही underweight
☛ समय समय पर स्वास्थ्य संबंधी जरुरी जाँच करवाते रहना चाहिए जिससे की किसी खतरनाक बिमारी से बचा जा सके
☛ स्वयं को विश्राम के लिए पर्याप्त समय दें
☛ अनावश्यक बालों को साफ करते रहें । बालों को हमेशा सँवार कर रखें। अपने बालों में तेल का नियमित उपयोग करें। बाल छोटे और साफ रखें,
☛ जरुरी दिनचर्या जैसे शौच, ब्रश, स्नान जैसी जरुरी आदतों को करना न भूले और एक निश्चित समय अंतराल पर करे ।
☛ मल-मू.त्र के वेग को कभी नहीं रोकना चाहिए अन्यथा पेट अथवा मूत्र रोग हो सकता है।
☛ किसी भी प्रकार का stress बिलकुल भी न ले स्वयं खुश रहे और दूसरो को भी खुश रखने की कोशिस करे । क्योंकि एक कहावत के अनुसार चिन्ता चिता के समान होती है ।
☛ अंग्रेजी दवाओ की जगह हमारे द्वारा सुझाये गए विभिन्न रोगों के आयुर्वेदिक और घरेलु नुस्खों का इस्तेमाल करे क्योंकि अंग्रेजी दवाओ के काफी side effects देखनो को मिलते है ।
और हमारी ये पोस्ट आपको कैसी लगी इस बारे में हमे comment के माध्यम से जरुर बताएं और शेयर लाइक करना न भूले जिससे यह ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुचे

Monday, 17 July 2017

गुड और जीरे के पानी के फायदे

गुड और जीरे के पानी के  फायदे

जीरा और गुड हमारे घरों में होता है। इनका इस्तेमाल हम खाना बनाने के लिए करते है। लेकिन क्या आपको पता है गुड और जीरे का पानी आपको और आपके परिवार को कई गंभीर छोटी-छोटी बीमारियों से बचा सकता है जिसकी वजह से आप लोग परेशान हो जाते हो। वैदिक वाटिका आपको बता रही है किन-किन बीमारियों से बच सकते हो गुड़ और जीरे के पानी से।
कैसे बनता है गुड और जीरे का पानी
बहुत ही आसान तरीके से बना सकते हैं आप इस आयुवेर्दिक पानी को। इसके सबसे पहले आप एक पतीले या बर्तन में दो कप पानी डाल दें और इसमें एक चम्मच गुड का चूरा और एक चम्मच जीरे को मिलाकर इसे अच्छी तरह से उबाल लें। और बाद में इसे किसी कप में डाल दें। अब आप इस पानी को पी सकते हैं।
कब करना है सेवन
इस आयुवेर्दिक पानी को रोज सुबह के खाने से पहले एक कप पीएं।
गुड और जीरे के पानी के फायदे
बदन का दर्द
पीठ का दर्द हो या कमर का दर्द। गुड और जीरे का पानी पीने से आपको इन सभी समस्याओं से निजात मिलता है।
बुखार में
बुखार होने पर जब शरीर गर्म हो जाता है तब आप बीमार इंसान को गुड और जीरे का पानी पिलाएं। इस पानी से सिर दर्द और बुखार में आराम मिलता है।
बचाता है एनीमिया से
शरीर में एनीमिया या खून की कमी को पूरा करने का काम करता है गुड़ और जीरे का बना हुआ पानी। साथ ही यह खून को भी साफ करता है।
शरीर को अंदर से साफ करता है
जीरा और गुड प्राकृतिक गुणों से भरपूर होते हैं जो शरीर के अंदर की गंदगी को साफ करके हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं। जिससे कोई भी गंभीर बीमारी शरीर को आसानी से नहीं लग पाती है।
पेट की समस्या
पेट की समस्याओं जैसे कब्ज, गैस, पेट फूलना और पेट दर्द की समस्याओं में यदि आप गुड और जीरे से बना हुआ पानी पीते हैं तो आपको फायदा मिलेगा। साथ ही ये रोग भी धीरे-धीरे खत्म हो जाते हैं।
मासिक धर्म की गड़बड़ी
मासिक धर्म में समस्या होने पर वह अनियमित हो जाते हैं जिससे पेट में दर्द और कई परेशानियां होने लगती है। महिलाओं के लिए जरूरी है कि वे गुड और जीरे का पानी जरूर पीएं।
ये सारी छोटी बीमारियां यदि समय पर ठीक हो जाएं तो आप बड़ी बीमारियों से आसानी से बच सकते हैं। इसलिए आपके लिए जरूरी है गुड और जीरे से बने पानी के फायदों के बारे में।

Sunday, 16 July 2017

बरगद का दूध चमत्कारी औसध

बरगद का  दूध चमत्कारी औसध 


बरगद के दूध का प्रयोग:- बरगद के पेड़ को तो सभी जानते हैं दोस्तों भारत में कई जगह इसको वट वृक्ष कहा जाता है और अंग्रेजी इसे Banyan Tree बोलते हैं इस पेड़ में बढे चमत्कारी गुण मौजूद हैं और इसका पेड़ का तना, उसकी छाल और, पत्ते, और फल यहाँ तक की इसका दूध सब बहुत ही काम के चीज़ें हैं यहाँ इस पोस्ट में हम आपको आज बता रहे हैं के बरगद के दूध का प्रयोग कैसे करें और शीघ्रपतन, स्वप्नदोष, मरदाना कमज़ोरी, शारीरिक व यौन दुर्बलता को कैसे दूर करें.

बरगद के पेड़ के बारे में जानकारी और इसका महत्व

बरगद के पेड़ का परिचय :- दोस्तों भारत में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो बरगद के पेड़को न जानता हो लगभग सभी ने इसको देखा हुआ है हमारे भारत में इसको वट वृक्ष, और बढ़ के नाम से भी जानते हैं और इस पेड़ को हमारे यहाँ बहुत पवित्र माना गया है। विशेषतौर पर बरगद के पेड़ को पर्व या तीज, त्यौहार पर इसकी पूजा की जाती है।

बरगद के दूध का प्रयोग कैसे करें – How To Use Banyan Milk With Batasha

बरगद के फल, तना और छाल, यहाँ तक के दूध भी बहुत काम आते हैं ये औषधीय गुणों से भरपूर हैं और बरगद के दूध का प्रयोग कैसे कर्रें ये हम इस पोस्ट में आपको बताएँगे. वट वृक्ष का दूध प्रयोग करने से आपकी शारीरिक का यौन दुर्बलता समाप्त होती है व वीर्य के विकार और स्वप्नदोष में भी बहुत फायदा मिलता है और साथ साथ आपकी स्तभ्न शक्ति भी बढ़ जाती है.
जिनको शारीरिक कमज़ोरी है या स्वप्नदोष की शिकायत रहती है और वीर्य पतला हो उन्हें बरगद के दूध का सेवन सुबह खली पेट करना चाहिए बताशे पर ५-६ बूँदें दूध की टपका लें और फिर खा लें इस तरह से आप 5  से 7 बताशे रोज़ खा सकते हैं. इसके प्रयोग से आपके सम्भोग करने की शक्ति भी बढ़ती है बरगद के पेड़ के बहुत फायदे हैं और स्त्री रोगों में भी ये गजब का काम करता है उसके लिए आप निचे पढ़ें.

बरगद के पेड़ का प्रयोग बहुत से रोगों में लाभकारी है

बरगद का पेड़ कसैला , शीतल, मधुर, और पाचन शक्तिवर्धक, भारी, पित्त, कफ (बलगम), व्रणों (जख्मों), धातु (वीर्य) विकार, पेशाब की जलन, योनि विकार, ज्वर (बुखार), वमन (उल्टी), विसर्प (छोटी-छोटी फुंसियों का दल) तथा शारीरिक और यौन दुर्बलता को खत्म करता है। यह दांत के दर्द और स्तन की शिथिलता (स्तनों का ढीलापन), रक्तप्रदर, श्वेत प्रदर (स्त्रियों का रोग), स्वप्नदोष, कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, बहुमूत्र (बार-बार पेशाब का आना), अतिसार (दस्त), बेहोशी, योनि दोष, गलित कुष्ठ (कोढ़), घाव, बिवाई (एड़ियों का फटना), सूजन, वीर्य का पतलापन, बवासीर, पेशाब में खून आना आदि रोगों में गुणकारी है.

काम शक्ति बढ़ाने में बरगद के पेड़ का प्रयोग

काम शक्ति बढ़ाने में भी बरगद के पेड़ का प्रयोग ऐसे करें और इसके साथ ही बहुत से रोगों में भी ये लाभकारी है यहाँ पढ़ें कुछ रोगों का इलाज. लगभग 50  ग्राम बरगद की ताज़ी कोपलें (मुलायम पत्तियां) इनको लेकर आप 250 मिलीलीटर पानी में जब तक पकायें जब एक चौथाई पानी बचे इसके बाद  इसे मतलब उस पानी को छानकर आधा किलो दूध में डालकर पकायें. अब इसमें आप लगभग 10 ग्राम ईसबगोल की भूसी और 10 ग्राम शकर मिलाकर पिएं आप देखंगे के सिर्फ 7 दिन तक इसको पीने से आपका वीर्य कितना गाढ़ा हो गया है और आपकी कामशक्ति में जबरजस्त बढ़ोत्तरी हुयी है.

लकवे रोग का चमत्कारिक इलाज जाने

लकवे रोग का चमत्कारिक इलाज जाने 


लकवे का इलाज और कारण : – लकवा एक खतरनाक बीमारी है और इस प्रकार के बॉडी का आधा हिस्सा काम करना बंद कर देता है. इस बीमारी में शरीर के अंगो में टेढ़ापन आ जाता है. ये बीमारी व्यक्ति की पूरी तरह से असहाय और दूसरों पर पूरी तरह से निर्भर हो जाते है. और हर छोटा से छोटा काम भी करने के लिए वो दुसरो पर निर्भर हो जाते है. लकवा एक लाइलाज बीमारी मानी जाती है लेकिन आयुर्वेद में इसका इलाज संभव है और इसका इलाज भी बहुत है.जब हमारी मांसपेशियाँ कार्य करने में पूर्णतः असमर्थ हों जाती है उस स्थिति को पक्षाघात, लकवा या फालिज कहते हैं.
लकवे होने पर प्रभावी क्षेत्र के भाग को उठाना, घुमाना, फिराना या चलना-फिरना लगभग असम्भव हो जाता है. लकवा अति भागदौड़, क्षमता से बहुत ज्यादा परिश्रम या बहुत अधिक व्यायाम, अति गरिष्ठ भोजन बहुत अधिक मात्रा में लेने से हो सकता है. लकवे का इलाज और कारण जानना बहुत ही जरूरी है. क्योंकि लकवे का इलाज और कारण जानकार हम इसे आसान से ठीक कर सकते है.लकवा होने के कारण कई सारे है जिन्हे जानना बहुत जरूरी है और लकवे की बीमारी शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है और नाड़ियों की कमजोरी के कारण भी लकवा हो जाता है. अचानक से शदमा लगने के कारण भी लकवा शरीर में फ़ैल जाता है

लकवे का इलाज और कारण

मांसपेशियों की दुर्बलता और मानसिक दुर्बलता के करना भी लकवा होने की सम्भावना रहती है. बढ़ता हुआ रक्तचाप और उलटी सामान्य से अधिक होना व साथ में दस्त का लगातार होना भी लकवे का मुख्य करना हो सकता है.जब अचानक मस्तिष्क के किसी हिस्से मे खून का दौरान रुक जाता है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और मस्तिष्क की कोशिकाओं के आस-पास खून एकत्र हो जाता है ऐसी अवस्था में शरीर के किसी भी हिस्से में लकवा हो सकता है अथवा किसी हिस्सों में रक्तवाहिका में खून का थक्का बनने के कारण खून की पूर्ति बंद हो जाय तो उस अंग में लकवा हो जाता है
लकवे की बीमारी के कई सारे लक्षण है जिन्हे आप पहले से पहचान सकते है की लकवा है या नहीं जैसे यदि शरीर की नसों का सुख जाना और उनमे तरल का न बहना और व्यक्ति का बोलना खत्म हो जाना भी इसका का लक्षण है. आँख नाक कान और मुँह आदि का टेढ़ा हो जाना बहुत ज़ोरो का सिरदर्द होना और बार बार चक्कर आना लकवा की बीमारी के लक्षण है. शरीर में बहुत तेज सी कम्पन होना भी लकवे का लक्षण है. यदि इन लक्षणों मेसे कोई भी एक लक्षण होता है तो वो लकवा हो सकता है और लकवे का ठीक समय पर उपचार करके इस बीमारी को शरीर में फैलने से रोक सकते है
लकवे में एक बहुत ही सटीक उपचार माना जाता है. उसके अनुसार इस उपचार में पहले दिन लहसुन की पूरी कली पानी के साथ निगल जाएँ. फिर नित्य 1-1 कली बढ़ाते हुए 21वें दिन पूरी 21 कलियाँ निगलें. तत्पश्चात 1-1 कली घटाते हुए निगले. इस प्रयोग को करने से लकवे में शीघ्र ही आराम मिलता है. 10 ग्राम सूखी अदरक और १० ग्राम बच पीसलें इसे ६० ग्राम शहद मिलावें. यह मिश्रण रोगी को 6 ग्राम रोज देते रहें. 10 लहसुन की 4 कली पीसकर दो चम्मच शहद में मिलाकर रोगी को चटा दें. लकवा रोगी का ब्लड प्रेशर नियमित जांचते रहें. अगर रोगी के खून में कोलेस्ट्रोल का लेविल ज्यादा हो तो रोगी तमाम नशीली चीजों से परहेज करे. भोजन में तेल,घी,मांस,मछली का उपयोग न करे.
बरसात में निकलने वाला लाल रंग का कीडा वीरबहूटी लकवा रोग में बेहद फ़ायदेमंद है. बीरबहूटी एकत्र कर लें. छाया में सूखा लें. सरसों के तेल पकावें. इस तेल से लकवा रोगी की मालिश करें. कुछ ही हफ़्तों में रोगी ठीक हो जायेगा. इस तेल को तैयार करने मे निरगुन्डी की जड भी कूटकर डाल दी जावे तो दवा और शक्तिशाली बनेगी. एक बीरबहूटी केले रोजाना देने से भी लकवा में अत्यन्त लाभ होता है. सफ़ेद कनेर की छाल और काला धतूरा के पत्ते बराबर वजन में लेकर सरसों के तेल में पकावें. यह तेल लकवाग्रस्त अंगों पर मालिश करें. अवश्य लाभ होगा. लहसुन की 5 कली दूध में उबालकर लकवा रोगी को नित्य देते रहें. इससे ब्लडप्रेशर ठीक रहेगा और खून में थक्का भी नहीं जमेगा.
लकवा का रोग होने पर एक काले कपड़े में पीपल की सूखी जड़ को बांधकर उसे लकवा से पीडि़त व्यक्ति के सिर के नीचे रखें तो कुछ ही दिनों में इससे लाभ मिलना शुरू हो जाता है.प्रत्येक शनिवार के दिन एक नुकीली कील से लकवा के रोगी के प्रभावित अंग को आठ बार उसारकर मन ही मन में शनिदेव का स्मरण करते हुए उसे पीपल के वृक्ष की मिट्टी में गाड़ दें। साथ ही यह निवेदन करें कि हे शनि देव जिस दिन लकवा का रोग दूर हो जाएगा, हम उस दिन किलों को निकाल लेंगे. ऐसा लगातार 21 शनिवार तक करें और जब लकवा का रोग ठीक हो जाए तब शनिदेव व पीपल को आभार प्रकट करते हुए वह सभी कीलें निकालकर उन्हें नदी में प्रवाहित कर दें.